बिहार में आय से अधिक संपत्ति के एक चर्चित मामले में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ग्रामीण कार्य विभाग, बिरौल के कार्यपालक अभियंता बालेश्वर राम को हिरासत में ले लिया। गुरुवार शाम हुई इस कार्रवाई के बाद विभागीय हलकों से लेकर स्थानीय स्तर तक चर्चा का माहौल बना रहा। निगरानी विभाग का आरोप है कि अभियंता ने अपनी वैध आय से करीब 90 लाख रुपये अधिक की संपत्ति अर्जित की है। इसी आरोप के आधार पर उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, निगरानी की आठ सदस्यीय टीम ने योजनाबद्ध तरीके से यह कार्रवाई की। टीम ने पहले बिरौल स्थित उनके कार्यालय पर पहुंचकर उन्हें हिरासत में लिया। इसके बाद डीएमसीएच में उनकी मेडिकल जांच कराई गई और प्रारंभिक पूछताछ की गई। आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद टीम उन्हें अपने साथ पटना ले गई, जहां आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
इस कार्रवाई का नेतृत्व निगरानी डीएसपी विंध्याचल प्रसाद और इंस्पेक्टर शशिशेखर चौधरी ने किया। सूत्रों के मुताबिक, निगरानी विभाग को पहले से ही अभियंता की संपत्ति और कार्यशैली को लेकर शिकायतें मिल रही थीं। आरोप था कि बिरौल में पदस्थापित होने के बावजूद वे कार्यालय का अधिकांश काम अपने निजी आवास से संचालित करते थे। इस संबंध में विभागीय स्तर पर भी असंतोष जताया गया था।
निगरानी की टीम ने एक साथ कई ठिकानों पर छापेमारी की। दरभंगा जिले के बिरौल स्थित कार्यालय के अलावा लहेरियासराय की हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में उनके किराये के आवास पर भी तलाशी ली गई। इसके अतिरिक्त पटना स्थित उनके निजी आवास और पश्चिम चंपारण जिले के बेतिया में स्थित पैतृक घर पर भी जांच की गई। इन सभी स्थानों पर दस्तावेजों और संपत्ति से जुड़े कागजातों को खंगाला गया।
गुरुवार शाम जब निगरानी की टीम तीन वाहनों से स्थानीय पुलिस बल के साथ लहेरियासराय पहुंची, तो इलाके में हलचल बढ़ गई। छापेमारी की खबर फैलते ही आसपास के लोगों में चर्चा शुरू हो गई। हालांकि अधिकारियों ने कार्रवाई के दौरान संयम बनाए रखा और पूरी प्रक्रिया को विधिसम्मत तरीके से अंजाम दिया। डीएसपी विंध्याचल प्रसाद ने अभियंता को हिरासत में लिए जाने की पुष्टि करते हुए कहा कि पूछताछ के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सूत्रों का कहना है कि कार्यालय से विशेष रूप से कोई बड़ी बरामदगी नहीं हुई, लेकिन कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए हैं, जिनकी जांच की जा रही है। निगरानी विभाग अब इन दस्तावेजों के आधार पर अभियंता की आय और संपत्ति के बीच अंतर का विस्तृत आकलन करेगा। मामला कांड संख्या 14/26 के तहत दर्ज किया गया है।
बिरौल-बेनीपुर एसएच 56 स्थित डुमरी जीरोमाइल के पास मौजूद कार्यालय में हुई इस कार्रवाई की चर्चा देर रात तक क्षेत्र में होती रही। स्थानीय स्तर पर लोग इस बात को लेकर हैरान थे कि विभाग के एक वरिष्ठ अभियंता पर इतने बड़े स्तर पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगा है। विभागीय कर्मचारियों के बीच भी इस कार्रवाई को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
बताया जाता है कि निगरानी विभाग को कुछ समय पहले ही अभियंता की संपत्ति को लेकर ठोस सूचनाएं मिली थीं। प्रारंभिक जांच में आय और संपत्ति के बीच बड़ा अंतर पाए जाने के बाद नियमित मामला दर्ज किया गया। इसके बाद साक्ष्यों के आधार पर छापेमारी और हिरासत की कार्रवाई की गई। फिलहाल निगरानी टीम सभी जब्त दस्तावेजों की जांच कर रही है और बैंक खातों, चल-अचल संपत्ति तथा अन्य निवेशों की पड़ताल की जा रही है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद ग्रामीण कार्य विभाग में हड़कंप की स्थिति है। विभाग के कई अधिकारी और कर्मचारी इस मामले को लेकर सतर्क नजर आ रहे हैं। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो आगे और सख्त कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें गिरफ्तारी और न्यायिक प्रक्रिया भी शामिल हो सकती है।
निगरानी विभाग की इस कार्रवाई को राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम का हिस्सा माना जा रहा है। हाल के दिनों में आय से अधिक संपत्ति के मामलों में लगातार छापेमारी और गिरफ्तारियां देखने को मिली हैं। अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
फिलहाल बालेश्वर राम से पूछताछ जारी है और निगरानी विभाग उनके संपत्ति विवरण, आय के स्रोत और सरकारी पद पर रहते हुए किए गए कार्यों की विस्तृत जांच कर रहा है। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे हो सकते हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि आरोप कितने ठोस हैं और आगे की कार्रवाई किस दिशा में जाएगी।
इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि सरकारी पद पर रहते हुए वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को गंभीरता से लिया जा रहा है। अब सबकी निगाहें निगरानी विभाग की अगली रिपोर्ट और कानूनी प्रक्रिया पर टिकी हैं।







