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घरेलू कलह से टूट चुकी मां को दारोगा ने लौटाई जिंदगी, गंगा से पहले थाम लिया भरोसा

February 4, 20261 Mins Read
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भागलपुर के विक्रमशिला सेतु पर वह पल किसी डरावने सपने से कम नहीं था। गंगा की तेज धारा, पुल के किनारे खड़ी एक घबराई हुई महिला और उसकी गोद में तीन महीने की मासूम बच्ची—सब कुछ कुछ ही सेकेंड में खत्म होने वाला था। लेकिन किस्मत ने उसी वक्त इंसानियत का हाथ आगे बढ़ाया। डायल 112 में तैनात एसआई सिकंदर कुमार ने न सिर्फ हालात को भांपा, बल्कि अपनी सूझबूझ और साहस से दो जिंदगियों को मौत के मुंह से खींच लिया।

यह घटना बिहार के भागलपुर जिले के प्रसिद्ध विक्रमशिला सेतु की है, जहां घरेलू विवाद और मानसिक प्रताड़ना से टूट चुकी एक महिला अपनी मासूम बच्ची के साथ गंगा में छलांग लगाने जा रही थी। महिला का दर्द इतना गहरा था कि उसे अपनी और बच्ची की जिंदगी से भी मोह नहीं रहा। लेकिन तभी मौके पर पहुंचे दारोगा ने “रियल हीरो” बनकर इतिहास रच दिया।

दरअसल, नवगछिया में डायल 112 में एसआई के पद पर तैनात सिकंदर कुमार अपनी ड्यूटी खत्म करने के बाद बाइक से भागलपुर स्थित अपने फ्लैट की ओर जा रहे थे। रात का वक्त था, ट्रैफिक सामान्य था, लेकिन जैसे ही वह विक्रमशिला सेतु पर पहुंचे, उनकी नजर एक असामान्य दृश्य पर पड़ी। पुल के किनारे एक महिला खड़ी थी, उसकी गोद में छोटी बच्ची थी और उसका व्यवहार बेहद अस्थिर लग रहा था। अनुभवी पुलिसकर्मी होने के नाते एसआई को कुछ गड़बड़ महसूस हुई।

उन्होंने बिना एक पल गंवाए बाइक रोकी और महिला की ओर बढ़े। इसी बीच महिला ने गंगा में कूदने की कोशिश की। हालात बेहद नाजुक थे—एक छोटी सी देरी दो जिंदगियां छीन सकती थी। एसआई सिकंदर कुमार ने फुर्ती दिखाते हुए महिला की साड़ी पकड़ ली और पूरी ताकत से उसे अपनी ओर खींच लिया। महिला संतुलन खो चुकी थी, बच्ची उसके सीने से चिपकी हुई थी। दारोगा ने पहले बच्ची को सुरक्षित अपनी गोद में लिया और फिर महिला को संभाला।

मौके पर मौजूद कुछ लोग भी तब तक रुक चुके थे। एसआई ने महिला को शांत करने की कोशिश की, उसे भरोसा दिलाया कि हर समस्या का समाधान है और उसकी बच्ची को उसकी जरूरत है। काफी देर तक समझाने-बुझाने के बाद महिला थोड़ा सामान्य हुई। इसके बाद पुलिस प्रक्रिया के तहत उसे विक्रमशिला टीओपी के हवाले कर दिया गया, जहां महिला से विस्तार से पूछताछ की गई और उसके परिजनों को सूचना दी गई।

महिला की पहचान नवगछिया थाना क्षेत्र के राघोपुर बहतरा गांव निवासी जीरा देवी के रूप में हुई है। जीरा देवी ने पुलिस को बताया कि उसकी शादी करीब दस साल पहले शंकरपुर निवासी सौरव से प्रेम विवाह के रूप में हुई थी। शुरुआती साल ठीक-ठाक गुजरे, लेकिन धीरे-धीरे रिश्ते में दरार आ गई। जीरा देवी का आरोप है कि उसके पति का किसी दूसरी लड़की से बातचीत को लेकर अक्सर विवाद होता था। इसी बात पर पति उसे शक की नजर से देखने लगा और आए दिन मारपीट करने लगा।

घटना वाले दिन भी पति से उसका झगड़ा हुआ था। जीरा देवी के मुताबिक, पति ने गुस्से में उसे घर से निकाल दिया और कहा—“जा, कहीं जाकर मर जा।” यही शब्द उसके दिल और दिमाग में गूंजते रहे। पहले से मानसिक रूप से परेशान जीरा देवी पूरी तरह टूट चुकी थी। वह अपनी तीन महीने की बच्ची को लेकर घर से निकल पड़ी और सीधे विक्रमशिला सेतु पहुंच गई, जहां उसने जिंदगी खत्म करने का फैसला कर लिया।

जीरा देवी की जिंदगी में दो बच्चे हैं—एक पांच साल का बेटा और तीन महीने की बेटी। जब उसने पुल से कूदने का फैसला किया, तब शायद उसे यह भी एहसास नहीं था कि उसका बेटा मां का इंतजार कर रहा होगा। लेकिन कहते हैं न, जब इंसान पूरी तरह हार जाता है, तब कहीं न कहीं से उम्मीद की किरण जरूर आती है। इस मामले में वह किरण एसआई सिकंदर कुमार बनकर आई।

बचाव के बाद जीरा देवी ने कहा कि अब वह कभी ऐसा कदम नहीं उठाएगी। उसने माना कि वह गुस्से और दुख में गलत फैसला लेने जा रही थी। महिला ने कहा कि अब वह मेहनत-मजदूरी करके अपने बच्चों का पालन-पोषण करेगी और उनके लिए जिएगी। उसकी आंखों में डर के साथ-साथ जिंदगी को एक और मौका मिलने की चमक साफ दिख रही थी।

वहीं एसआई सिकंदर कुमार ने बताया कि जब उन्होंने महिला को देखा, तो उसकी हालत बेहद खराब थी। वह बुरी तरह घबराई हुई थी और बच्ची को सीने से लगाए हुए थी। उन्होंने कहा कि अगर महिला छलांग लगा भी देती, तो वह उसके पीछे गंगा में कूदने से पीछे नहीं हटते। उनके लिए यह सिर्फ ड्यूटी नहीं, बल्कि इंसानियत का सवाल था।

इस घटना के बाद पूरे भागलपुर में एसआई सिकंदर कुमार की जमकर तारीफ हो रही है। लोग उन्हें “रियल लाइफ हीरो” कह रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी यह घटना तेजी से वायरल हो रही है और लोग पुलिस के इस मानवीय चेहरे की सराहना कर रहे हैं। आमतौर पर पुलिस को सख्ती और कार्रवाई से जोड़ा जाता है, लेकिन इस घटना ने दिखा दिया कि वर्दी के पीछे एक संवेदनशील इंसान भी होता है।

विक्रमशिला सेतु पर उस दिन दो जिंदगियां बचीं, लेकिन इसके साथ ही समाज के सामने एक बड़ा सवाल भी खड़ा हुआ—घरेलू हिंसा और मानसिक प्रताड़ना आखिर कब तक लोगों को ऐसे खतरनाक फैसले लेने पर मजबूर करती रहेगी? यह घटना सिर्फ एक साहसी दारोगा की कहानी नहीं, बल्कि उन अनगिनत महिलाओं की पीड़ा की झलक है, जो चुपचाप सब सहती रहती हैं।

फिलहाल, जीरा देवी और उसकी मासूम बच्ची सुरक्षित हैं। उनकी सांसें चल रही हैं, उम्मीद जिंदा है और इसका पूरा श्रेय जाता है उस दारोगा को, जिसने सही वक्त पर सही कदम उठाकर गंगा से पहले भरोसे की डोर थाम ली।

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