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गरीबों के घर रोशन करने की बड़ी पहल: बिहार में मुफ्त सोलर रूफटॉप योजना

February 4, 20261 Mins Read
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बिहार सरकार ने राज्य के गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए एक बड़ी और दूरगामी योजना की घोषणा की है। इस योजना के तहत गरीब परिवारों की छतों पर मुफ्त सोलर रूफटॉप सिस्टम लगाए जाएंगे, जिससे उन्हें सस्ती, स्वच्छ और भरोसेमंद बिजली मिल सकेगी। सरकार का दावा है कि इस पहल से गांव से लेकर शहर तक 22 से 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी और राज्य की ऊर्जा व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी।

 

पिछले कुछ वर्षों में बिहार ने बिजली के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। जुलाई पिछले वर्ष से राज्य सरकार पहले ही गरीब उपभोक्ताओं को सवा सौ यूनिट तक मुफ्त बिजली उपलब्ध करा रही है। अब इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए सरकार ने सोलर ऊर्जा को बढ़ावा देने का फैसला किया है। ऊर्जा विभाग के अनुसार, राज्य के लगभग 58 लाख गरीब बिजली उपभोक्ताओं के घरों पर 1.1 किलोवाट क्षमता वाले सोलर रूफटॉप प्लांट लगाए जाएंगे। इस योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, ताकि इसका लाभ अधिकतम लोगों तक पहुंच सके।

योजना के पहले चरण में करीब 10 लाख घरों की छतों पर सोलर प्लांट लगाए जाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद धीरे-धीरे बाकी पात्र परिवारों को भी इस योजना से जोड़ा जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे गरीब परिवारों का बिजली बिल लगभग शून्य हो जाएगा और वे अपनी जरूरत की बिजली खुद पैदा कर सकेंगे। साथ ही, अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भी भेजी जा सकेगी, जिससे राज्य की कुल बिजली उपलब्धता में इजाफा होगा।

सिर्फ गरीब परिवारों के घर ही नहीं, बल्कि आने वाले पांच वर्षों में सरकारी भवनों पर भी 500 मेगावाट क्षमता के रूफटॉप सोलर प्लांट लगाए जाएंगे। इसमें स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, कार्यालय और अन्य सरकारी इमारतें शामिल होंगी। इस कदम से न सिर्फ सरकारी बिजली खर्च में कमी आएगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी यह एक अहम कदम साबित होगा।

मंगलवार को बिहार विधानसभा में बजट पेश करते हुए ऊर्जा एवं सह-वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने इस योजना की घोषणा की। उन्होंने कहा कि बिहार में आर्थिक विकास के साथ-साथ बिजली की मांग में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। यदि आंकड़ों पर नजर डालें तो करीब दो दशक पहले बिहार की कुल बिजली खपत मात्र 700 मेगावाट थी, जो अब बढ़कर 8,752 मेगावाट तक पहुंच चुकी है। यह आंकड़ा राज्य की बढ़ती औद्योगिक, व्यावसायिक और घरेलू जरूरतों को दर्शाता है।

ऊर्जा मंत्री ने बताया कि बिहार सरकार ने बिजली उत्पादन और वितरण को मजबूत करने के लिए चरणबद्ध तरीके से काम किया है। पहले के समय में बिहार के पास अपना कोई बड़ा बिजली उत्पादन केंद्र नहीं था। इस कमी को दूर करने के लिए सरकार ने सबसे पहले बिजली घरों के निर्माण पर जोर दिया। बरौनी, कांटी, नवीनगर, कजरा, पीरपैंती और चौसा जैसे स्थानों पर बिजली उत्पादन संयंत्र स्थापित किए गए, जिससे राज्य की उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

इसके बाद बिजली के संचरण (ट्रांसमिशन) नेटवर्क को मजबूत करने का काम शुरू हुआ। वर्ष 2005 में बिहार में केवल 45 ग्रिड मौजूद थे, जो अब बढ़कर 175 ग्रिड हो चुके हैं। इसके अलावा 16 नए ग्रिड निर्माणाधीन हैं। पहले जहां लगभग 5,000 सर्किट किलोमीटर संचरण तार बिछे थे, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 21,165 सर्किट किलोमीटर तक पहुंच गया है। साथ ही, 2,369 सर्किट किलोमीटर अतिरिक्त तार बिछाने का काम भी जारी है।

बिजली वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए राज्य के हर गांव, कस्बे और शहर में बिजली पहुंचाई गई है। सरकार का दावा है कि अब राज्य के सभी इच्छुक लोगों को बिजली कनेक्शन उपलब्ध करा दिया गया है। गली-मोहल्लों में तार बिछाए गए हैं और भीड़भाड़ वाले इलाकों में दुर्घटनाओं से बचने के लिए कवर्ड तार लगाए गए हैं। पटना जैसे बड़े शहरों में तो बिजली के भूमिगत तार भी बिछाए जा रहे हैं, ताकि व्यवस्था सुरक्षित और आधुनिक बन सके।

इन तमाम प्रयासों का नतीजा यह है कि आज बिहार में गांव से लेकर शहर तक लगभग 22 से 24 घंटे बिजली आपूर्ति हो रही है। यह स्थिति पहले के मुकाबले एक बड़ा बदलाव मानी जा रही है, जब लंबे समय तक बिजली कटौती आम बात थी। सरकार का अनुमान है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 तक राज्य की बिजली खपत बढ़कर 9,600 मेगावाट तक पहुंच सकती है। इसे ध्यान में रखते हुए उत्पादन और वितरण दोनों स्तरों पर तैयारी की जा रही है।

इसके अलावा, मीटर रीडिंग और स्पॉट बिलिंग सिस्टम लागू होने से बिजली बिल में होने वाली गड़बड़ियों में भी काफी कमी आई है। उपभोक्ताओं को अब समय पर और सही बिल मिल रहा है, जिससे शिकायतों की संख्या घटी है।

कुल मिलाकर, मुफ्त सोलर रूफटॉप योजना बिहार के लिए सिर्फ एक ऊर्जा परियोजना नहीं, बल्कि गरीबों को आत्मनिर्भर बनाने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम है। यदि यह योजना सफलतापूर्वक लागू होती है, तो आने वाले वर्षों में बिहार सोलर ऊर्जा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है।

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