केंद्रीय बजट 2026 के आने से पहले बिहार की जनता और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। राज्य की अपेक्षाएं काफी ऊँची हैं और सरकार से दो लाख करोड़ रुपए से अधिक की उम्मीद की जा रही है। हालांकि, इतने बड़े आवंटन की संभावना कम लगती है। फिर भी, पिछले बजट और चुनावी साल के अनुभव के आधार पर बिहार को बेहतर आवंटन मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

पिछले बजट में बिहार के लिए लगभग 60,000 करोड़ रुपए की घोषणाएं की गई थीं। उस समय बजट एक चुनावी वर्ष के दबाव में था, लेकिन इस बार ऐसा कोई दबाव नहीं है। बावजूद इसके, राज्य में रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए कई अहम घोषणाओं की उम्मीद है। इसमें कौशल विकास, सहकारिता, कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), शहरी विकास, पर्यटन, जल प्रबंधन, सड़क और हवाईअड्डा निर्माण जैसे कई क्षेत्रों को प्राथमिकता मिलने की संभावना है।
विशेषकर प्रधानमंत्री आवास योजना और वी-जीरामजी जैसे योजनाओं में आवंटन अपेक्षाकृत कम हो सकता है। बिहार अब देश में तेजी से विकास कर रहा राज्य माना जाता है, इसलिए इसे ठहराव में नहीं रखा जा सकता। कृषि, उद्योग, तकनीक आधारित आधारभूत संरचना और पर्यटन के साथ-साथ जल प्रबंधन के क्षेत्र में बड़ी घोषणाओं की उम्मीद जताई जा रही है।
राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में देखें तो एनडीए में जदयू की स्थिति मजबूत है। इसका मतलब है कि राज्य की अपेक्षाओं की अनदेखी करना मुश्किल होगा। यह दोनों ही कारण बिहार के बेहतर बजट आवंटन की संभावना को और बढ़ाते हैं। पिछले कुछ बजटों में बिहार को विशेष ध्यान मिला है और कई विशेष पैकेज क्रियान्वित भी हुए हैं। ऐसे में इस बार भी नई परियोजनाओं के लिए मार्ग प्रशस्त हो सकता है।
बिहार की जल और मानव संसाधन संपन्नता उसे कई योजनाओं और आधुनिक तकनीक में निवेश की उम्मीद देती है। राज्य में नए उद्योगों के विकास और क्षेत्रीय समृद्धि को बढ़ाने के लिए सहयोग की मांग भी जोर पकड़ रही है। रोजगार और रोजी-रोजगार आज भी सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है और कई सामाजिक-आर्थिक समस्याएं इसी पर निर्भर हैं।
बजट में आधारभूत संरचना, बाढ़ नियंत्रण, रोजगार और कृषि के क्षेत्र में बड़े फैसलों की उम्मीद है। वहीं, विपक्षी दलों जैसे राजद द्वारा राज्य को विशेष दर्जा देने की मांग दोहराई जा रही है। हालांकि, वर्तमान वैधानिक ढांचा इसे लागू करने की अनुमति नहीं देता। ऐसे में केंद्र सरकार बिहार को वैकल्पिक पैकेज के रूप में नई योजनाओं की पेशकश कर सकती है।
हालांकि, कुछ अपेक्षाएं अधूरी रह सकती हैं। बिहार ने जीएसडीपी की तुलना में दो प्रतिशत अतिरिक्त उधारी की अनुमति मांगी है। इसकी मंजूरी मिलना मुश्किल लगता है क्योंकि केंद्र का भी राजकोषीय घाटा बढ़ रहा है। सरकार ने इसे 4.4 प्रतिशत तक सीमित रखने की प्रतिबद्धता जताई है, जो अब चुनौतीपूर्ण साबित हो रही है। इसके अलावा उप-कर और अधिभार (सेस और सरचार्ज) को विभाज्य कोष में सम्मिलित करने की मांग पर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
यदि इसे मंजूरी मिलती भी है, तो इसके लिए संविधान में संशोधन की आवश्यकता होगी, क्योंकि इस राशि से सामरिक महत्व की परियोजनाओं को आगे बढ़ाना संभव हो सकेगा। वर्तमान वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में केंद्र इस मद में कटौती करने के लिए ज्यादा सहज नहीं है। इसलिए, बिहार या अन्य राज्यों को सेस और सरचार्ज से हिस्सेदारी मिलने की संभावना कम ही दिखाई देती है।
बजट से उम्मीदें मुख्य रूप से तीन बड़ी श्रेणियों में केंद्रित हैं – इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य, तथा कृषि और जल प्रबंधन।
इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी:
बिहार में नए हवाईअड्डे, हाईवे, रेलवे लिंक, शहरी ढांचा और पर्यटन सर्किट के लिए बड़ा आवंटन अपेक्षित है। विशेष रूप से पटना हवाईअड्डे के विस्तार या नए कारिडोर की घोषणा की संभावना है। ये निवेश राज्य की लॉजिस्टिक क्षमता बढ़ाएंगे और औद्योगिक एवं पर्यटन विकास को गति देंगे।
रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य:
कौशल विकास और एमएसएमई क्षेत्र में फोकस बढ़ने की उम्मीद है। कृषि आधारित उद्योग, विशेषकर फूड प्रोसेसिंग सेक्टर, में निवेश से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के प्रयास से राज्य में जीवन स्तर में सुधार आएगा और प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
कृषि और ग्रामीण विकास:
किसानों के लिए क्रेडिट लिमिट में वृद्धि, कोल्ड स्टोरेज निर्माण, सिंचाई परियोजनाओं और नए कृषि तकनीक के उपयोग से खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लाभ मिलेगा।
नदी और जल प्रबंधन:
पिछली बार इस क्षेत्र में 11,500 करोड़ रुपए का आवंटन हुआ था, जो मुख्य रूप से तटबंधों, बैराज और नदियों के मोड़ पर केंद्रित था। इस बार बाढ़ प्रबंधन के लिए तकनीक संचालित और लंबी अवधि की रणनीति के साथ बड़े पैकेज की उम्मीद की जा रही है।
कुल मिलाकर, बिहार को इस बजट से अपेक्षा है कि राज्य में औद्योगिक विकास, जल प्रबंधन, रोजगार सृजन, आधारभूत संरचना और पर्यटन क्षेत्र में पर्याप्त निवेश हो। राजनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टियों से जदयू की स्थिति मजबूत होने के कारण, केंद्र सरकार बिहार को नजरअंदाज नहीं कर पाएगी और राज्य के विकास के लिए विशेष घोषणाएं कर सकती है।







