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बिहार का मखाना कैसे बना 3 करोड़ मासिक का ब्रांड: नदीम इकबाल की डिजिटल क्रांति की कहानी

January 27, 20261 Mins Read
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कटिहार का रहने वाला 24 साल का युवा नदीम इकबाल आज बिहार का नाम देशभर में मखाने के सुपरफूड ब्रांड के रूप में चमका रहा है। उनके प्रयासों से पिता मुहम्मद रईस का पारंपरिक थोक व्यवसाय एक संगठित और लाभकारी स्टार्टअप ‘नेचर्स मखाना’ में बदल गया।

मुहम्मद रईस पिछले तीन दशकों से मखाने के थोक व्यापारी रहे। उनका व्यवसाय स्थानीय स्तर पर था और मुनाफा अक्सर कम हो जाता था। परिवार चाहता था कि नदीम डॉक्टर बने, लेकिन नदीम का दृष्टिकोण अलग था। नोएडा से बीबीए करने के दौरान उन्होंने अपने कॉलेज प्रोजेक्ट में मखाने की मार्केट और इसकी क्षमता पर रिसर्च की। उन्हें समझ आया कि मखाना सिर्फ लोकल उत्पाद नहीं, बल्कि सुपरफूड के रूप में बड़े स्तर पर कामयाबी पा सकता है।

2024 में, नदीम ने ‘नेचर्स मखाना’ की शुरुआत की। उन्होंने बिचौलियों को हटा कर सीधे किसानों से कच्चा मखाना खरीदा और एक आधुनिक सप्लाई चेन तैयार की। 50 से अधिक किसानों को जोड़कर और 100 लोगों की टीम बनाकर मखाने को ‘पॉप’ करने की प्रक्रिया शुरू की। इसके साथ ही नदीम ने ग्रेडिंग और पैकिंग की नई प्रणाली अपनाई, जो पहले किसी पारंपरिक व्यवसाय में नहीं होती थी।

नदीम ने दिल्ली में खारी बावली में वेयरहाउस स्थापित किया और सेल्स टीम के माध्यम से बड़े ब्रांड्स और व्यवसायिक घरानों से संपर्क किया। शुरुआती महीने में बिजनेस 1 करोड़ रुपये मासिक तक पहुंचा। इसके बाद, नदीम ने सोशल मीडिया का सहारा लिया।

इंस्टाग्राम रील्स पर मखाने की पैकिंग और ग्रेडिंग की सरल वीडियो डाली। बिना अपना चेहरा दिखाए, उन्होंने छोटे विज्ञापन बजट के माध्यम से मार्केटिंग शुरू की। यह तरीका बेहद प्रभावी साबित हुआ। देशभर से ऑर्डर आने लगे और अब उनके इंस्टाग्राम पेज पर हर महीने 7-8 लाख व्यूज आते हैं। इस रणनीति से उन्हें 13 से अधिक राज्यों में नए क्लाइंट मिले।

आज, ‘नेचर्स मखाना’ 3 करोड़ रुपये मासिक का रेवेन्यू जेनरेट करता है। कंपनी न केवल अपने ब्रांड पैकिंग में मखाना बेचती है, बल्कि अन्य ब्रांड्स के लिए व्हाइट लेबलिंग की सुविधा भी देती है। नदीम का मानना है कि उनका व्यवसाय उनके MBA का वास्तविक प्रैक्टिकल अनुभव है।

पिता मुहम्मद रईस भी हैरान हैं कि उनका पारंपरिक व्यवसाय सोशल मीडिया के माध्यम से अब देशभर में बड़े ब्रांड्स की पहली पसंद बन गया। नदीम की कहानी यह दिखाती है कि डिजिटल मार्केटिंग, स्मार्ट रणनीति और मेहनत के साथ पारंपरिक व्यवसाय को भी आधुनिक और लाभकारी बनाया जा सकता है।

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