अलीनगर थाना क्षेत्र के जयंतीपुर गांव में सरस्वती पूजा के प्रतिमा विसर्जन के दौरान शुरू हुआ मामूली विवाद अचानक गंभीर हिंसा में बदल गया। डीजे बजाने और नारेबाजी को लेकर दो समुदायों के बीच तनातनी इतनी बढ़ गई कि देखते ही देखते दोनों ओर से जमकर पथराव शुरू हो गया। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत और तनाव का माहौल कायम हो गया, जिसे काबू में करने के लिए पुलिस को कड़ा कदम उठाना पड़ा।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रविवार को विसर्जन जुलूस के दौरान सबसे पहले रास्ते में बाइक खड़ी करने को लेकर बहस हुई थी। उस समय मौजूद लोगों और आयोजकों ने बीच-बचाव कर मामला शांत करा दिया था। हालांकि, इस छोटे से विवाद ने बाद में बड़ा रूप ले लिया। इसके कुछ ही देर बाद डीजे बजाने को लेकर फिर से कहासुनी शुरू हो गई, जिससे दोनों पक्षों में नाराजगी बढ़ती चली गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि डीजे पर बज रहे धार्मिक नारों को लेकर दूसरे पक्ष ने आपत्ति जताई थी। इसी बात को लेकर माहौल गर्म हो गया। हालात बिगड़ते देख उस समय डीजे को वहां से हटा दिया गया और लगा कि मामला शांत हो गया है। लेकिन यह शांति ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी।
सोमवार की शाम एक बार फिर दोनों गुट आमने-सामने आ गए। पहले तीखी बहस हुई और फिर अचानक एक पक्ष की ओर से पत्थरबाजी शुरू हो गई। कुछ ही पलों में स्थिति बेकाबू हो गई और दोनों तरफ से ईंट-पत्थर चलने लगे। सड़क पर चारों ओर पत्थर बिखर गए, जिससे राहगीरों और स्थानीय लोगों में अफरा-तफरी मच गई।
इस हिंसक झड़प में कई दुकानों को नुकसान पहुंचा है। दुकानों के शीशे टूट गए और कुछ जगहों पर संपत्ति को भी क्षति पहुंची। पथराव के दौरान लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए। कई परिवार अपने घरों में दुबक गए और पूरे गांव में सन्नाटा छा गया।
घटना की जानकारी मिलते ही अलीनगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। हालात की गंभीरता को देखते हुए बहेड़ा, सकतपुर और बिरौल थानों से भी अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। बेनीपुर एसडीपीओ स्वयं घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति को संभालने में जुट गए। पुलिस ने दोनों पक्षों को अलग-अलग कर तनाव कम करने की कोशिश की।
एसएसपी जगुनाथ रेड्डी ने बताया कि शुरुआती विवाद बाइक को लेकर हुआ था, जो बाद में अन्य मुद्दों को लेकर बढ़ गया और हिंसा में बदल गया। उन्होंने कहा कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन एहतियात के तौर पर गांव में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। पूरे इलाके में लगातार गश्त की जा रही है ताकि दोबारा कोई अप्रिय घटना न हो।
प्रशासन ने जयंतीपुर गांव को अस्थायी रूप से पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया है। संवेदनशील स्थानों पर जवानों की तैनाती की गई है और किसी भी अफवाह पर तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। सोशल मीडिया पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है, ताकि भड़काऊ संदेश फैलने से रोका जा सके।
घटना के बाद गांव के लोगों में भय का माहौल है। लोग घरों से बाहर निकलने में झिझक रहे हैं। वहीं, स्थानीय समाजसेवी और बुजुर्ग शांति बनाए रखने की अपील कर रहे हैं। उनका कहना है कि त्योहार आपसी भाईचारे और सौहार्द का प्रतीक होते हैं, लेकिन इस तरह की घटनाएं समाज में नकारात्मक संदेश देती हैं।
पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पथराव और उपद्रव में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है। सीसीटीवी फुटेज और वीडियो के आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।
फिलहाल हालात तनावपूर्ण जरूर हैं, लेकिन पुलिस की मौजूदगी से स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होने की उम्मीद जताई जा रही है। प्रशासन लगातार दोनों पक्षों से संवाद कर रहा है ताकि गांव में शांति बहाल की जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।







