जहानाबाद। नीट की तैयारी कर रही एक छात्रा से कथित रूप से दरिंदगी के मामले में हाल ही में एफएसएल रिपोर्ट में छात्रा के कपड़ों पर वीर्य (स्पर्म) के निशान मिलने के बाद परिजनों ने एसआईटी जांच पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पीड़िता के पिता ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे आत्मदाह करने को मजबूर हो सकते हैं। उनका कहना है कि वर्तमान जांच प्रक्रिया से वे संतुष्ट नहीं हैं और चाहते हैं कि इस मामले की न्यायिक जांच सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के न्यायधीश से कराई जाए।

परिवार के अनुसार, छात्रा के साथ हुई घटना की सही और निष्पक्ष जांच नहीं हो रही है। पिता ने कहा कि मीडिया के सामने स्पष्ट रूप से मामला है, लेकिन इसके बावजूद जांच सही दिशा में नहीं चल रही। उनका आरोप है कि छात्रावास संचालक इस मामले में दोषी हैं, लेकिन स्थानीय एसएचओ की मिलीभगत के कारण जांच को गलत दिशा में मोड़ दिया गया। इससे वे और परिवार पूरी तरह मर्माहत हैं और उन्हें वर्तमान जांच प्रणाली पर कोई भरोसा नहीं है।
पीड़िता के पिता का कहना है कि एसआईटी लगातार उनकी परेशान कर रही है। जांच के दौरान उन्हें बार-बार जहानाबाद बुलाया जाता है जबकि छात्रावास संचालक और संबंधित लोगों से पर्याप्त पूछताछ नहीं की जा रही है। उनके अनुसार, ऐसा लगता है कि इस मामले में परिजन ही दोषी दिखाए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार परिजनों को निशाना बनाकर बुलाना और उनसे जांच करवाना न्याय की प्रक्रिया के खिलाफ है।
सूत्रों के अनुसार, इस मामले में एसआईटी ने परिवार के सदस्यों से ब्लड सैंपल लेने के लिए फिर से छात्रा के घर का रुख किया है। यह पांचवीं बार है जब एसआईटी टीम जहानाबाद पहुंच रही है। परिजनों का कहना है कि एसआईटी ने उन्हें रात में ही सूचना दी थी कि ब्लड सैंपल लेने के लिए टीम डॉक्टर के साथ पटना से निकल रही है। हालांकि, रात साढ़े दस बजे तक एसआईटी की टीम उनके गांव में नहीं पहुंची थी।
इस बीच पीड़िता के पिता ने मीडिया से कहा कि जांच की दिशा और तरीका पूरी तरह गलत है। उन्होंने यह भी कहा कि उनका परिवार न्याय पाने के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन वर्तमान प्रणाली में भरोसा नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे अत्यधिक कदम उठाने पर मजबूर होंगे।
कथित एफएसएल रिपोर्ट में छात्रा के कपड़ों पर वीर्य के निशान पाए जाने के बाद यह मामला और भी संवेदनशील हो गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, एफएसएल रिपोर्ट को जांच में निर्णायक साक्ष्य के रूप में देखा जा सकता है। वहीं, परिजनों का कहना है कि जांच में देरी और गलत दिशा परिवार और पीड़िता दोनों के लिए मानसिक रूप से कठिनाई पैदा कर रही है।
स्थानीय पुलिस और SIT के बीच भी आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। परिवार के अनुसार, एसआईटी टीम बार-बार उनके गांव आ रही है लेकिन आरोपी और उनके सहयोगियों से पर्याप्त पूछताछ नहीं हो रही। उनके मुताबिक, यह प्रक्रिया न्याय की अपेक्षा को बाधित कर रही है और पीड़िता तथा परिवार पर अतिरिक्त मानसिक दबाव डाल रही है।
विशेषज्ञ कहते हैं कि इस तरह की संवेदनशील जांचों में परिवार और पीड़िता को सहयोग देना और उन्हें तनाव से बचाना बहुत जरूरी होता है। लेकिन वर्तमान मामला इसके विपरीत नजर आ रहा है। परिवार का कहना है कि यदि सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट से न्यायिक जांच नहीं हुई तो उन्हें विश्वास नहीं है कि उन्हें न्याय मिलेगा।
परिजनों का यह भी कहना है कि इस मामले में मीडिया और समाज का समर्थन महत्वपूर्ण है। उन्होंने अधिकारियों से अपील की है कि दोषियों के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई की जाए और जांच में देरी न हो। उनका कहना है कि इस मामले में जितनी देरी हो रही है, उतनी ही पीड़िता और परिवार मानसिक रूप से परेशान हो रहे हैं।
इस घटना ने जहानाबाद और आसपास के क्षेत्रों में भी चिंता पैदा कर दी है। स्थानीय लोग और सामाजिक संगठन भी मामले पर नजर बनाए हुए हैं और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। साथ ही यह मामला नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही छात्राओं और उनके परिवारों में सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
इस मामले में एसआईटी का रवैया और जांच की धीमी गति पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। परिवार ने स्पष्ट किया है कि वे न्याय पाने तक शांत नहीं होंगे। उन्होंने स्थानीय प्रशासन और न्यायिक अधिकारियों से अपील की है कि इस मामले में निष्पक्ष और त्वरित जांच सुनिश्चित की जाए।
कुल मिलाकर, यह मामला केवल एक छात्रा की सुरक्षा और न्याय तक ही सीमित नहीं है। यह समाज में महिला सुरक्षा, छात्रावासों की निगरानी और न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल उठाता है। ऐसे में अधिकारियों और न्यायिक संस्थानों की जिम्मेदारी बनती है कि वे जल्द से जल्द इस मामले को निष्पक्ष तरीके से सुलझाएं और पीड़िता व उसके परिवार को न्याय दिलाएं।







