बिहार के गोपालगंज जिले में एक नाबालिग लड़की के साथ रविवार को हुई दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। जानकारी के मुताबिक, शहर के एक मोहल्ले में दो युवकों ने किशोरी को घर के सामने से जबरन ले जाकर बंद किया और उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके साथ ही विरोध करने पर उसकी बेरहमी से पिटाई भी की गई और आंख पर हमला कर उसकी दृष्टि को नुकसान पहुंचाया गया।

पीड़िता की उम्र कम होने के कारण यह मामला बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। नगर थाने की पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और मामले की जांच में जुट गई। सब-इंस्पेक्टर राखी कुमारी ने बताया कि पीड़िता का बयान दर्ज किया गया है और उसकी मेडिकल जांच भी मॉडल सदर अस्पताल में कराई जा रही है।
पीड़िता की मां ने बताया कि उनकी बेटी घर पर थी, तभी अचानक दो युवक आए और उसे अपने साथ ले गए। किशोरी ने पुलिस को दिए बयान में कहा कि युवकों ने उसके साथ दुष्कर्म किया और उसके विरोध करने पर उसकी आंख पर हमला कर दिया, जिससे वह धुंधला देखने लगी।
नगर थानाध्यक्ष प्रवीण कुमार प्रभाकर ने कहा कि प्रारंभिक जांच के अनुसार यह मामला प्रेम प्रसंग से जुड़ा लग रहा है, लेकिन पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है। उन्होंने कहा, “पीड़िता का बयान दर्ज कर लिया गया है और प्राथमिकी भी दर्ज कर दी गई है। आरोपी युवकों की पहचान कर उन्हें जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।”
स्थानीय लोग इस घटना से स्तब्ध हैं। कई लोगों ने कहा कि नाबालिग लड़कियों के खिलाफ बढ़ते अपराध समाज में असुरक्षा की भावना पैदा करते हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा केवल पुलिस का काम नहीं है, बल्कि समाज के हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बिहार में नाबालिगों के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं। हालांकि सरकार ने कानून और हेल्पलाइन जैसी सुविधाएं शुरू की हैं, लेकिन जमीन पर उनका असर सीमित नजर आता है। ऐसे मामलों में समाज और प्रशासन दोनों की सक्रियता जरूरी है।
पीड़िता के परिवार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि इस घटना ने पूरे परिवार को मानसिक रूप से तोड़ दिया है। माता-पिता डर रहे हैं कि उनकी बेटी अब सामान्य जीवन नहीं जी पाएगी। उन्होंने पुलिस और प्रशासन से अपील की है कि दोषियों को तुरंत गिरफ्तार कर कड़ी सजा दी जाए।
पुलिस ने आसपास के सीसीटीवी फुटेज और संभावित गवाहों के बयान भी जुटाने शुरू कर दिए हैं। थानाध्यक्ष ने कहा कि त्वरित कार्रवाई से ही दोषियों को पकड़ा जा सकता है और उन्हें न्याय दिलाया जा सकता है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं और बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने वाले एनजीओ भी इस मामले में सक्रिय हो गए हैं। उनका कहना है कि नाबालिग लड़कियों के साथ होने वाले अपराधों को रोकने के लिए कानूनी, सामाजिक और मानसिक सहायता तुरंत उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है।
गोपालगंज में हुई इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बच्चों और किशोरियों की सुरक्षा पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता। समाज और प्रशासन दोनों को मिलकर काम करना होगा ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके और दोषियों को कानून के तहत कड़ी सजा मिले।







