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ई-केवाईसी की धीमी रफ्तार, बिहार में 1.56 करोड़ राशन कार्डधारकों की बढ़ी चिंता

January 23, 20261 Mins Read
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बिहार में मुफ्त राशन योजना से जुड़े करोड़ों लाभार्थियों के लिए सरकार की ओर से सख्त चेतावनी सामने आई है। राज्य में अब भी 1 करोड़ 56 लाख राशन कार्डधारकों ने ई-केवाईसी (आधार सीडिंग) की प्रक्रिया पूरी नहीं की है। ऐसे में अगर तय समय सीमा के भीतर यह काम नहीं हुआ, तो इन लाभार्थियों को मिलने वाला मुफ्त अनाज बंद हो सकता है और उनका नाम राशन कार्ड सूची से हटाए जाने का खतरा भी बढ़ गया है।

खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने इस मामले में साफ रुख अपनाते हुए कहा है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत राशन पाने वाले सभी लाभार्थियों के लिए ई-केवाईसी अनिवार्य है। विभाग ने राज्य के सभी जिलों को निर्देश जारी कर 15 फरवरी तक शत-प्रतिशत ई-केवाईसी सुनिश्चित करने को कहा है। अधिकारियों का कहना है कि इसके बाद लंबित मामलों पर सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो बिहार में कुल राशन लाभार्थियों की संख्या 8 करोड़ 30 लाख से अधिक है। इनमें से 6 करोड़ 74 लाख लोगों का ई-केवाईसी अब तक पूरा हो चुका है। हालांकि, अभी भी करीब 19 प्रतिशत लाभार्थी ऐसे हैं, जिनकी आधार सीडिंग नहीं हो सकी है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, यह आंकड़ा चिंता बढ़ाने वाला है, क्योंकि इतनी बड़ी संख्या में लोग योजना से बाहर हो सकते हैं।

केंद्र सरकार ने भी स्पष्ट कर दिया है कि मुफ्त राशन की पात्रता बनाए रखने के लिए आधार से लिंक होना जरूरी है। सरकार का मानना है कि ई-केवाईसी से फर्जी राशन कार्ड, दोहरे नाम और अपात्र लाभार्थियों की पहचान की जा सकेगी। इससे सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग रुकेगा और वास्तविक जरूरतमंदों को समय पर लाभ मिलेगा।

ई-केवाईसी को लेकर लोगों में फैली गलतफहमियों को दूर करने के लिए विभाग ने कुछ अहम बातें भी स्पष्ट की हैं। राज्य के वे राशन कार्डधारक जो रोजगार, पढ़ाई या अन्य कारणों से बिहार से बाहर रह रहे हैं, उन्हें ई-केवाईसी कराने के लिए अपने गांव या जिले लौटने की आवश्यकता नहीं है। देश के किसी भी हिस्से में वे अपने नजदीकी उचित मूल्य दुकान या जन वितरण प्रणाली की दुकान पर जाकर यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

बिहार में फिलहाल 2 करोड़ 90 लाख से अधिक परिवारों के पास राशन कार्ड हैं। इन परिवारों से जुड़े लाभार्थियों को केंद्र और राज्य सरकार की ओर से मुफ्त अनाज उपलब्ध कराया जा रहा है। जिलावार आंकड़ों से साफ होता है कि पूर्वी चंपारण जिले में सबसे ज्यादा लाभार्थी हैं। यहां 42 लाख 12 हजार से अधिक लोग मुफ्त राशन योजना के तहत पंजीकृत हैं।

पूर्वी चंपारण के बाद मुजफ्फरपुर जिले में 40.59 लाख, राजधानी पटना में 38.73 लाख, समस्तीपुर में 37.04 लाख, मधुबनी में 35.83 लाख और दरभंगा में 34.41 लाख लाभार्थी हैं। इसके अलावा पश्चिम चंपारण में 32.69 लाख और गया जिले में 30.78 लाख लोग मुफ्त राशन योजना से जुड़े हुए हैं। इन जिलों में प्रशासन पर ई-केवाईसी को तेजी से पूरा कराने का दबाव बढ़ गया है।

दूसरी ओर, कुछ जिले ऐसे भी हैं जहां लाभार्थियों की संख्या कम है, लेकिन ई-केवाईसी की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर मानी जा रही है। अरवल जिले में सिर्फ 4.58 लाख लाभार्थी हैं और यहां अधिकांश का ई-केवाईसी पूरा हो चुका है। इसी तरह शेखपुरा में 4.96 लाख और शिवहर में 5.50 लाख लाभार्थी हैं। अरवल, कैमूर और बक्सर जैसे जिलों में लगभग 87 प्रतिशत लाभार्थियों का ई-केवाईसी पूरा किया जा चुका है, जिसे प्रशासन की अच्छी उपलब्धि माना जा रहा है।

हालांकि, कुछ जिले ऐसे हैं जहां ई-केवाईसी की रफ्तार बेहद धीमी है। वैशाली जिले में सबसे ज्यादा 22 प्रतिशत यानी करीब 6.20 लाख राशन कार्डधारकों का ई-केवाईसी लंबित है। इसके अलावा सीवान और सीतामढ़ी जिलों में भी लगभग 21 प्रतिशत लाभार्थी अब तक आधार सीडिंग से बाहर हैं। इन जिलों को विशेष निगरानी में रखा गया है और स्थानीय प्रशासन को जागरूकता अभियान तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।

खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग का कहना है कि ई-केवाईसी सिर्फ एक तकनीकी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह सरकारी योजनाओं को पारदर्शी और प्रभावी बनाने का जरिया है। आधार से लिंक होने पर यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि अनाज सही व्यक्ति तक पहुंचे और किसी भी तरह की गड़बड़ी या भ्रष्टाचार की गुंजाइश न रहे।

सरकार ने सभी राशन कार्डधारकों से अपील की है कि वे अंतिम तारीख का इंतजार किए बिना जल्द से जल्द ई-केवाईसी करवा लें। इससे न केवल उनका मुफ्त राशन सुरक्षित रहेगा, बल्कि भविष्य में किसी भी तरह की कानूनी या प्रशासनिक परेशानी से भी बचा जा सकेगा। तय समय सीमा के बाद अगर कार्रवाई होती है, तो जिम्मेदारी पूरी तरह लाभार्थियों की मानी जाएगी।

फिलहाल, बिहार में ई-केवाईसी को लेकर प्रशासनिक स्तर पर गतिविधियां तेज कर दी गई हैं। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि कितने लोग समय रहते प्रक्रिया पूरी कर पाते हैं और कितनों को मुफ्त राशन योजना से बाहर होना पड़ता है।

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