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पत्नी और ससुराल की प्रताड़ना से तंग युवक ने की आत्महत्या, वीडियो में बयां की पीड़ा

January 22, 20261 Mins Read
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बिहार के समस्तीपुर जिले से एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी मचा दी है। ताजपुर थाना क्षेत्र के सारंगपुर निवासी 31 वर्षीय युवक विश्वजीत कुमार ने अपनी पत्नी और ससुराल पक्ष की कथित प्रताड़ना से तंग आकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर दी। विश्वजीत ने कथित तौर पर जहरीला पदार्थ सेवन किया और इलाज के दौरान दरभंगा के एक निजी अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई।

विश्वजीत की मौत को और भी चिंताजनक और विवादित बनाने वाला पहलू यह है कि उन्होंने अपने मोबाइल फोन पर एक वीडियो रिकॉर्ड किया था, जिसमें उन्होंने अपने परिवार और समाज के सामने अपनी पीड़ा और आपबीती बयां की। वीडियो में विश्वजीत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनकी सास, पत्नी और अन्य ससुराल वाले उन्हें लगातार मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का शिकार बना रहे थे। उन्होंने वीडियो में यह भी कहा कि पिछले पांच साल से उन्हें इस प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है, और अब वे इस दर्द से तंग आकर अपनी जान देने के लिए मजबूर हो गए हैं।

वीडियो में विश्वजीत ने यह भी साफ किया कि उनकी संपत्ति केवल उनके माता-पिता की होगी और उनकी मौत के बाद उन्हें यह चीज़ किसी अन्य विवाद में न फंसाया जाए। उन्होंने अपने आखिरी शब्दों में कहा कि “मैं मरने जा रहा हूं, लेकिन मेरी जमीन-जायदाद सिर्फ मेरे माता-पिता के नाम रहनी चाहिए।”

विश्वजीत के परिवार ने इस घटना को लेकर गहरा दुख व्यक्त किया है। उनके बड़े भाई इंद्रजीत कुमार ने बताया कि विश्वजीत की शादी साल 2016 में हुई थी और उनके दो छोटे बच्चे भी हैं। इंद्रजीत ने आरोप लगाया कि विश्वजीत की पत्नी पिछले पांच वर्षों से अपने मायके में ही रह रही थी और बार-बार पैसे देने का दबाव बना रही थी। इंद्रजीत का कहना है कि पत्नी ने विश्वजीत पर 25 लाख रुपये देने का दबाव डाला और पैसे न देने पर तलाक की धमकी दी।

विश्वजीत के परिवार ने यह भी कहा कि इस दौरान उन्हें बार-बार मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ी। इंद्रजीत का आरोप है कि केवल महिलाओं को ही कानूनी प्राथमिकता देने वाले कानूनों के कारण उन्हें न्याय नहीं मिल पाया और विश्वजीत लगातार डिप्रेशन में चले गए। परिवार का कहना है कि यदि समाज और कानून पुरुषों की भी समस्याओं को गंभीरता से देखते, तो यह दर्दनाक घटना टाली जा सकती थी।

विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसा घटनाक्रम सिर्फ व्यक्तिगत स्तर का मामला नहीं है, बल्कि समाज में मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक दबाव की एक गंभीर समस्या को दर्शाता है। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार प्रताड़ना और दबाव किसी भी व्यक्ति को आत्महत्या की ओर ले जा सकता है, और ऐसे मामलों में परिवार और समाज का समर्थन बेहद जरूरी होता है।

दरभंगा के निजी अस्पताल के अधिकारियों ने पुष्टि की कि विश्वजीत को जहरीला पदार्थ खाने के बाद तत्काल अस्पताल लाया गया, लेकिन गंभीर हालत के कारण उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। अस्पताल के डॉक्टरों ने कहा कि समय पर इलाज और उचित चिकित्सकीय हस्तक्षेप के बावजूद, मरीज की हालत अत्यंत गंभीर थी।

इस घटना ने न केवल परिवार को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि समाज में भी सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि पारिवारिक विवाद और आर्थिक दबाव के चलते युवा वर्ग पर गंभीर मानसिक दबाव बनता जा रहा है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि परिवारिक मतभेद और आर्थिक तनाव को सुलझाने के लिए कानूनी और मनोवैज्ञानिक सहायता समय पर उपलब्ध कराना अत्यंत जरूरी है।

विश्वजीत के भाई इंद्रजीत ने मीडिया से बातचीत में यह भी कहा कि उनकी सास और पत्नी द्वारा लगातार प्रताड़ना और धमकियों के कारण ही विश्वजीत ने यह कदम उठाया। उन्होंने न्याय की गुहार लगाते हुए कहा कि उनके भाई की मौत का जिम्मेदार केवल वही लोग हैं जिन्होंने उन्हें मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान किया।

यह घटना एक बार फिर समाज को यह याद दिलाती है कि पारिवारिक तनाव, घरेलू विवाद और मानसिक दबाव कितने खतरनाक हो सकते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे मामलों में समय पर काउंसलिंग, कानूनी मार्गदर्शन और सामाजिक समर्थन प्रदान करना जीवन बचा सकता है।

विश्वजीत की मौत के बाद इलाके में मातम है। परिवार के लोग और पड़ोसी इस दुखद घटना से स्तब्ध हैं। वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय प्रशासन ने भी मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, घटना को गंभीरता से लिया जा रहा है और सभी पहलुओं की जांच की जा रही है कि क्या किसी प्रकार की जबरदस्ती या प्रताड़ना हुई थी।

इस दुखद घटना ने समाज में यह संदेश भी भेजा है कि मनोवैज्ञानिक दबाव और घरेलू प्रताड़ना की अनदेखी खतरनाक परिणाम दे सकती है। विश्वजीत का मामला केवल व्यक्तिगत विवाद का नहीं, बल्कि सामाजिक और कानूनी दृष्टिकोण से भी सोचने पर मजबूर करता है कि क्या समाज पुरुषों और महिलाओं की समस्याओं के प्रति समान संवेदनशीलता दिखा पा रहा है।

अंत में, परिवार और समाज का यह कहना है कि यदि समय पर किसी ने विश्वजीत को समझा और उनकी मदद की होती, तो यह दर्दनाक अंत टाला जा सकता था। विश्वजीत की मौत एक चेतावनी की तरह है कि मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक तनाव को गंभीरता से लेना आज के समय में कितना जरूरी है।

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