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पूर्णिया में युवक की संदिग्ध मौत, परिवार हत्या का आरोप लगाकर सदमे में

January 19, 20261 Mins Read
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पूर्णिया, बिहार: रविवार की सुबह पूरे पूर्णिया जिले में एक घटना ने परिवार और आसपास के लोगों को झकझोर दिया। अमौर थाना क्षेत्र के सेहलो गांव निवासी 31 वर्षीय मो. रब्बान घर से अपनी पत्नी को मायके घुमाने का वादा करके निकले, लेकिन कुछ ही घंटों में उनकी मौत की खबर ने पूरे परिवार को हिला कर रख दिया। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए पूर्णिया जीएमसीएच भेज दिया।

रब्बान की पत्नी साबुत्ता परवीन ने बताया कि उनका पति प्रदेश में रंग-पेंट का काम करते थे और पांच दिन पहले ही घर आए थे। रविवार सुबह 7 बजे वह बेहद खुश दिखाई दिए और पत्नी को मायके ले जाने की बात कही। उन्होंने कहा, “तुम खाना बनाकर रखो, हम जल्दी आकर तुम्हें मायके घुमाने ले जाएंगे।” पत्नी ने उनके कहे अनुसार खाना तैयार किया और इंतजार करने लगी।

दो घंटे बीत जाने पर जब रब्बान घर नहीं लौटे, तो पत्नी ने उनके मोबाइल पर कॉल किया। इस पर फोन किसी अजनबी ने उठाया और कहा कि “आपके पति की सड़क हादसे में मौत हो गई है, उनका शव पूर्णिया जीएमसीएच में है।” यह सुनते ही परिजन दौड़ते हुए अस्पताल पहुंचे। वहाँ पहुँचकर उन्होंने रब्बान का शव देखा।

परिजनों के अनुसार, मृतक के सिर पर गहरे जख्म थे। पत्नी और परिवार का आरोप है कि यह केवल सड़क हादसा नहीं है, बल्कि हत्या का मामला है, जिसे दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की जा रही है। रब्बान की पत्नी साबुत्ता परवीन अस्पताल परिसर में अपने छोटे बच्चे को गोद में लेकर सदमे में बैठ गईं। मृतक के तीन छोटे बच्चे हैं, जिन्हें अचानक अपने पिता को खोने का सदमा झेलना पड़ा।

पुलिस ने क्या कहा

अधिकारियों ने बताया कि पोस्टमार्टम के परिणाम के बाद ही मौत की सही वजह सामने आएगी। अमौर थाना के एसएचओ ने कहा कि फिलहाल सभी संभावित पहलुओं की जांच की जा रही है। पुलिस ने कहा कि घटना स्थल, गवाहों के बयान और CCTV फुटेज की मदद से मामले की छानबीन की जा रही है। उन्होंने परिजनों से सहयोग की अपील की और आश्वासन दिया कि यदि हत्या सिद्ध होती है, तो दोषियों को कानून के अनुसार सजा दी जाएगी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि रब्बान एक मेहनती और शांत स्वभाव के युवक थे। गांव और आसपास के लोग इस घटना से स्तब्ध हैं। उनका मानना है कि यह घटना सिर्फ एक व्यक्तिगत नुकसान नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है कि किसी भी असामान्य घटना को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए।

परिवार का दर्द और चिंता

साबुत्ता परवीन ने बताया, “हमारे पति हमेशा बच्चों और परिवार की देखभाल करते थे। उनकी अचानक और संदिग्ध मौत ने हमारी जिंदगी पूरी तरह बदल दी। तीन छोटे बच्चे अब समझ ही नहीं पा रहे हैं कि उनके पिता अब हमारे साथ नहीं हैं। यह हमारे लिए किसी बड़ी त्रासदी से कम नहीं है।”

परिजन पुलिस और प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि मामले की निष्पक्ष और त्वरित जांच की जाए। उनका आरोप है कि रब्बान की हत्या किसी कारणवश की गई और इसे सड़क हादसे का रूप दिया जा रहा है। परिवार ने स्पष्ट कहा कि दोषियों को कानून के कटघरे में लाना ही उनकी प्राथमिक मांग है।

सामाजिक और कानूनी दृष्टिकोण

विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना ने स्पष्ट कर दिया कि समाज में परिवार और व्यक्तियों की सुरक्षा पर और ध्यान देने की आवश्यकता है। अचानक किसी के जीवन का छिन जाना न केवल परिवार बल्कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा प्रभाव डालता है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि परिवार और समाज की जिम्मेदारी है कि वे सुरक्षा के प्रति सतर्क रहें। पुलिस और प्रशासन को भी ऐसे मामलों में तेजी से कार्रवाई करनी चाहिए। केवल कानून व्यवस्था पर्याप्त नहीं है; सामाजिक जागरूकता और स्थानीय प्रशासन की सक्रियता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

घटना के बाद प्रशासन और पुलिस की स्थिति

अधिकारियों ने कहा कि मामले की जांच पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के असली कारणों का खुलासा होगा। पुलिस ने आश्वासन दिया कि हत्या साबित होने पर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

इस घटना ने पूरे जिले और आसपास के इलाकों में चिंता और डर पैदा कर दिया है। लोग पूछ रहे हैं कि कैसे एक व्यक्ति की मौत संदिग्ध स्थिति में इतनी जल्दी हो सकती है और परिवार को इतने सदमे में डाल सकती है। यह घटना समाज में सुरक्षा और न्याय प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करती है।

कुल मिलाकर

पूर्णिया में मो. रब्बान की संदिग्ध मौत ने दिखा दिया कि परिवार और समाज के लिए सुरक्षा कितनी महत्वपूर्ण है। पुलिस की सतर्कता, पोस्टमार्टम और कानूनी प्रक्रिया ही परिवार को न्याय दिलाने का माध्यम हैं। साथ ही यह घटना याद दिलाती है कि हर परिवार की सुरक्षा और बच्चों के कल्याण के लिए निरंतर प्रयास और जागरूकता आवश्यक है।

यह मामला केवल एक व्यक्तिगत नुकसान नहीं है; यह सामाजिक चेतना, सुरक्षा और न्याय की आवश्यकता का प्रतीक भी है। पूरे परिवार और स्थानीय लोगों की मांग है कि दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए और उन्हें कानून के अनुसार सजा मिले, ताकि किसी अन्य परिवार को इसी तरह का सदमा न झेलना पड़े।

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