बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के जल वितरण का विवाद अब खत्म हो गया है। यह मामला पिछले 26 सालों से दोनों राज्यों के बीच उलझा हुआ था। मूल रूप से वाणसागर समझौता 1973 में हुआ था, जब सोन नदी के पानी को लेकर बिहार और यूपी में विवाद था। 2000 में बिहार से झारखंड के अलग होने के बाद झारखंड ने भी जल हिस्सेदारी की अपनी मांग उठाई।

अब दोनों राज्य जल बंटवारे के फार्मूले पर सहमत हो गए हैं और जल्द ही इस पर औपचारिक एमओयू (MoU) होगा। बिहार सरकार ने इस संबंध में केंद्र को भी सूचना दे दी है और मुख्य सचिव स्तर पर समझौते की तारीख तय की जाएगी।
इस समझौते के अनुसार, सोन नदी के कुल 7.75 मिलियन एकड़ फीट (MAF) पानी में से बिहार को 5 MAF और झारखंड को 2.75 MAF पानी मिलेगा। इस बंटवारे से बिहार के आठ जिलों को सीधे लाभ मिलेगा और सिंचाई की सुविधा बेहतर होगी। इसके साथ ही बिहार ने इन्द्रपुरी जलाशय निर्माण योजना में तेजी से काम शुरू कर दिया है। डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है और राज्य मंत्रिपरिषद की मंजूरी के बाद परियोजना आगे बढ़ेगी।
यूपी से डूब क्षेत्र को लेकर हुआ विवाद भी सुलझा
इन्द्रपुरी जलाशय (पूर्व में कदवन जलाशय) रोहतास जिले के मटिआंव में बनाया जाना था। 1990 में इसका डीपीआर केंद्रीय जल आयोग को सौंपा गया था, लेकिन यूपी ने जल स्तर के कारण ओबरा पनबिजलीघर पर असर पड़ने का हवाला देकर विरोध किया। बाद में जलाशय की पूर्ण जलस्तर (FRL) को घटाकर 169 मीटर और अधिकतम जलस्तर 171 मीटर किया गया, जिससे यूपी ने भी सहमति दे दी।
इस प्रकार लंबे समय से लंबित जल विवाद अब सुलझ गया है और बिहार व झारखंड के किसानों और सिंचाई क्षेत्र के लिए नई उम्मीदें खुल गई हैं।







