Shopping cart

Breaking News :
  • Home
  • बिहार
  • पटना
  • दानापुर-बिहटा-कोइलवर एलिवेटेड फोरलेन कॉरिडोर से पटना-यूपी-दिल्ली कनेक्टिविटी होगी तेज
पटना

दानापुर-बिहटा-कोइलवर एलिवेटेड फोरलेन कॉरिडोर से पटना-यूपी-दिल्ली कनेक्टिविटी होगी तेज

January 29, 20261 Mins Read
14

पटना में यातायात की समस्या और जाम से राहत दिलाने के लिए देश का पहला दानापुर-बिहटा-कोइलवर एलिवेटेड फोरलेन कॉरिडोर तैयार हो रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने के बाद न केवल पटना शहर में जाम की समस्या काफी हद तक कम होगी, बल्कि पटना से यूपी और दिल्ली की दूरी भी काफी घट जाएगी। एनएचएआई के परियोजना निदेशक अरविंद कुमार ने हाल ही में दानापुर स्थित कॉरिडोर के पास संवाददाता सम्मेलन में जानकारी दी कि यह परियोजना 2027 के जुलाई तक पूरी होने की संभावना है।

परियोजना का वर्तमान हाल और लागत

दानापुर-बिहटा-कोइलवर फोरलेन कॉरिडोर की लंबाई लगभग 25 किलोमीटर है और इसके निर्माण में कुल 389 पिलर बनाए जाने हैं। इन पिलरों में से अब तक 350 पिलर तैयार हो चुके हैं, यानी परियोजना का लगभग 45 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। कुल लागत 1969 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है।

परियोजना के पूरा होने के बाद एलिवेटेड सड़क पर गाड़ियां तेज़ गति से चल सकेंगी। यह सड़क पटना के मुख्य इलाकों को जोड़ते हुए सीधे बिहटा एयरपोर्ट तक पहुंच सुनिश्चित करेगी।

सात रैंप जोड़ेंगे दूसरी सड़कें

एलिवेटेड कॉरिडोर में कुल सात रैंप बनाए जाएंगे, जो दूसरी सड़क और आसपास के इलाकों से इसे जोड़ेंगे। इनमें से चार रैंप दानापुर स्टेशन के पास, दो रैंप नेउरागंज पर, और एक रैंप एयरपोर्ट से कोइलवर तक बनाया जाएगा। सबसे ऊंचा रैंप दानापुर में होगा, जिसकी ऊंचाई लगभग 25 मीटर होगी। यह रैंप क्षेत्रीय आवागमन को आसान बनाएगा और ट्रैफिक को सुचारु रूप से चलने में मदद करेगा।

इस तरह, यह परियोजना सिर्फ एक एलिवेटेड सड़क नहीं है, बल्कि शहर की सड़क नेटवर्किंग और कनेक्टिविटी को नया रूप देने वाली परियोजना के रूप में उभर रही है।

कॉरिडोर का निचला हिस्सा हरियालीयुक्त और फोरलेन

एलिवेटेड रोड के निचले हिस्से को भी फोरलेन बनाया जाएगा। यह हिस्सा पूरी तरह से हरियालीयुक्त होगा और शहर की सौंदर्यता को बढ़ाने में मदद करेगा। पटना पार्क प्रमंडल इस हिस्से की देखभाल करेगा और इसे रंग-बिरंगे फूल-पत्तियों और सजावटी पौधों से सजाया जाएगा।

इस पहल का उद्देश्य केवल सड़क निर्माण नहीं, बल्कि पटना शहर के वातावरण और दृश्य सौंदर्य को भी सुधारना है। कॉरिडोर के नीचे का हिस्सा स्थानीय ट्रैफिक के लिए खुला रहेगा, जिससे दैनिक आवागमन सुचारु रूप से हो सके।

पटना से बिहटा की दूरी घटेगी, समय की बचत होगी

अभी पटना से बिहटा जाने के लिए दानापुर, सगुना मोड़ और शिवाला जैसी जगहों पर भारी जाम का सामना करना पड़ता है। 25 किलोमीटर की दूरी तय करने में आमतौर पर एक से दो घंटे लग जाते हैं।

एलिवेटेड कॉरिडोर के पूरा होने के बाद यह सफर 20 से 25 मिनट में पूरा हो जाएगा। इससे न केवल पटना से सीधे बिहटा एयरपोर्ट तक कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी, बल्कि दानापुर, सगुना मोड़ और शिवाला पर ट्रैफिक का दबाव भी कम होगा।

भारी वाहनों, बढ़ती आबादी और स्थानीय ट्रैफिक के कारण इन इलाकों में अक्सर जाम की स्थिति बनती है। इस एलिवेटेड कॉरिडोर से ऊपर सड़क पर तेज गति से आवागमन होगा, जबकि नीचे स्थानीय ट्रैफिक सुचारु रूप से चलेगा।

यूपी और दिल्ली के लिए भी लाभ

इस परियोजना के पूरा होने से सिर्फ पटना शहर का ट्रैफिक ही नहीं सुधरेगा, बल्कि पटना से यूपी और दिल्ली की दूरी भी कम होगी। यात्रियों और वाणिज्यिक वाहनों के लिए यह रोड कनेक्टिविटी समय और ईंधन दोनों की बचत करेगी।

विशेष रूप से उन लोगों के लिए यह परियोजना लाभकारी होगी जो रोजाना पटना-यूपी या दिल्ली यात्रा करते हैं। जाम में फंसे बिना, अब वे तेज गति से गंतव्य तक पहुंच सकेंगे।

सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन

एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण में सुरक्षा मानकों का भी पूरा ध्यान रखा गया है। रैंप और मुख्य सड़कें ऐसे डिज़ाइन की गई हैं कि भारी वाहन और रोजाना की लोकल ट्रैफिक को अलग-अलग लेवल पर नियंत्रित किया जा सके। इससे दुर्घटनाओं की संभावना कम होगी और ट्रैफिक मैनेजमेंट भी बेहतर होगा।

नगर प्रशासन और एनएचएआई का मानना है कि इस परियोजना से पटना की सड़क सुरक्षा और सुगम आवागमन सुनिश्चित होगा। एलिवेटेड कॉरिडोर की वजह से ट्रैफिक पुलिस और प्रशासन को भी नियंत्रण में मदद मिलेगी।

परियोजना के पूरा होने के बाद शहर में बदलाव

एलिवेटेड कॉरिडोर के पूरा होने के बाद पटना शहर का नजारा ही बदल जाएगा। न केवल ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी, बल्कि शहर के आसपास के इलाकों में भी व्यापार और आवागमन का सुधार होगा। सड़क पर तेज़ गति से गाड़ियां चलेंगी और नीचे लोकल ट्रैफिक सुचारु रहेगा।

पटना-यूपी-दिल्ली कनेक्टिविटी का नया मार्ग बनने से व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी। ट्रक और लॉजिस्टिक कंपनियों के लिए यह रोड समय और लागत दोनों की बचत करेगी।

Related Posts