पटना मेट्रो परियोजना के कॉरिडोर-2 में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की गई है। राजधानी पटना में पीएमसीएच स्टेशन से गांधी मैदान तक अंडरग्राउंड सुरंग की खुदाई का काम शुरू कर दिया गया है। पहली टनल बोरिंग मशीन (TBM) ने लगभग 20 मीटर तक खुदाई पूरी कर ली है, वहीं दूसरी मशीन को चालू करने के लिए रिंग लगाने का कार्य तेजी से चल रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि इसी सप्ताह दूसरी मशीन भी खुदाई शुरू कर देगी।

इस सेक्शन में सुरंग निर्माण का पूरा कार्य शहर के सबसे व्यस्त और घनी आबादी वाले इलाकों से होकर गुजर रहा है, इसलिए इस हिस्से को तकनीकी रूप से सबसे चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। मिट्टी की मजबूती, आसपास की पुरानी इमारतों की सुरक्षा और सड़क यातायात पर नियंत्रण इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी चुनौती है।
पीएमसीएच–गांधी मैदान अंडरग्राउंड कॉरिडोर
जब यह सुरंग पूरी तरह तैयार हो जाएगी, तो मोइनुल हक स्टेडियम से पटना विश्वविद्यालय, पीएमसीएच, गांधी मैदान और आकाशवाणी होते हुए पटना जंक्शन तक एक लंबा अंडरग्राउंड कॉरिडोर बन जाएगा। यह कॉरिडोर पटना मेट्रो परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। इसके पूरा होने से राजधानी के व्यस्त इलाकों में ट्रैफिक जाम और भीड़ से काफी राहत मिलने की उम्मीद है।
इस अंडरग्राउंड रूट की अहमियत इसलिए भी है क्योंकि यह पटना के व्यस्ततम इलाकों को जोड़ता है। पीएमसीएच, गांधी मैदान और पटना यूनिवर्सिटी जैसे प्रमुख क्षेत्रों तक पहुंच अब तेज और सुविधाजनक हो जाएगी। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि सड़क परिवहन पर दबाव भी कम होगा।
पहले कितनी दूरी पूरी हुई थी
इससे पहले, मोइनुल हक स्टेडियम से पटना विश्वविद्यालय तक 1480 मीटर लंबी सुरंग का निर्माण पूरा किया गया था। इस काम के बाद दोनों टनल बोरिंग मशीनों को बाहर निकाला गया था। मेंटेनेंस के बाद इन्हें फिर से पटना विश्वविद्यालय से पीएमसीएच और गांधी मैदान की दिशा में उतारा गया। इस सेक्शन में कुल 2302 मीटर लंबी सुरंग बनाई जानी है।
इस प्रक्रिया में सबसे बड़ी रुकावट राधा कृष्ण मंदिर की वजह से आई थी। मंदिर के पास मशीन की खुदाई लगभग 952 मीटर के बाद रुक गई थी। जमीन अधिग्रहण के लिए नोटिस जारी किया गया, लेकिन पुजारी और स्थानीय लोगों के विरोध के कारण मामला कुछ समय के लिए अटका रहा।
मंदिर के पास तकनीकी समाधान
करीब तीन महीने तक टनल बोरिंग मशीन मंदिर के पास रुकी रही। बाद में आधुनिक तकनीक की मदद से मशीन को बेहद सावधानी से मंदिर के बाहरी और नीचे वाले हिस्से से रिंग के सहारे निकालकर पीएमसीएच स्टेशन परिसर तक लाया गया। पहली टनल बोरिंग मशीन 10 नवंबर और दूसरी 10 दिसंबर को स्टेशन परिसर में लाई गई। इसके बाद ही दोनों मशीनों ने फिर से खुदाई का काम शुरू किया।
पीएमसीएच–गांधी मैदान सेक्शन की चुनौतियां
इस सेक्शन की लंबाई लगभग 1350 मीटर है और यह पटना के सबसे व्यस्त इलाकों से होकर गुजरता है। ऐसे में काम को सुरक्षित और तेज़ी से आगे बढ़ाना चुनौतीपूर्ण रहा है। मिट्टी की मजबूती, आसपास की इमारतों की संरचना, सड़क यातायात और स्थानीय गतिविधियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
पटना मेट्रो के अधिकारियों का कहना है कि इस हिस्से में सुरंग निर्माण के लिए आधुनिक टनलिंग तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। मशीनरी और तकनीक का सही इस्तेमाल कर काम को सुरक्षित और समय पर पूरा करने की कोशिश की जा रही है।
मेट्रो से राजधानी को मिलेगी राहत
पीएमसीएच–गांधी मैदान अंडरग्राउंड कॉरिडोर के पूरा होने के बाद राजधानी के लोग मेट्रो के माध्यम से अपने गंतव्य तक जल्दी और आराम से पहुंच सकेंगे। इसके साथ ही शहर में बढ़ते ट्रैफिक जाम और सड़क पर वाहनों की भीड़ पर भी नियंत्रण होगा।
मेट्रो परियोजना के विशेषज्ञों का कहना है कि यह सेक्शन तकनीकी रूप से सबसे चुनौतीपूर्ण है, लेकिन इसमें सुरक्षा और गति दोनों पर बराबर ध्यान दिया जा रहा है। आने वाले महीनों में जैसे-जैसे खुदाई का काम तेज़ होगा, पटनावासियों को अंडरग्राउंड मेट्रो सफर का अनुभव मिलने की संभावना और बढ़ जाएगी।
भविष्य की योजनाएं
पटना मेट्रो कॉरिडोर-2 के इस अंडरग्राउंड सेक्शन के पूरा होने के बाद शहर का यातायात ढांचा काफी हद तक बदल जाएगा। पीएमसीएच, गांधी मैदान और पटना यूनिवर्सिटी जैसे प्रमुख इलाकों तक पहुंचने के लिए अब सड़क मार्ग पर निर्भर रहना कम होगा। यह प्रोजेक्ट शहर की ट्रैफिक समस्या के समाधान की दिशा में एक बड़ी छलांग साबित होगा।
पटना मेट्रो प्राधिकरण का कहना है कि परियोजना के इस हिस्से में काम शुरू होते ही काम की रफ्तार बढ़ गई है। आने वाले महीनों में जैसे-जैसे सुरंग की खुदाई पूरी होगी, पटनावासियों को अंडरग्राउंड मेट्रो सफर की उम्मीद और मजबूत होती नजर आएगी।
इस तरह, पीएमसीएच से गांधी मैदान तक सुरंग निर्माण का काम पटना मेट्रो परियोजना के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो रहा है। यह न केवल राजधानी में लोगों की यात्रा को आसान बनाएगा, बल्कि शहर की सड़क यातायात प्रणाली को भी बेहतर बनाएगा।







