सहरसा जिले में एक हैंडलूम दुकान से हुई करीब छह लाख रुपये की चोरी की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। जांच में यह सामने आया है कि इस वारदात के पीछे किसी बाहरी गिरोह का हाथ नहीं, बल्कि दुकान से जुड़े पुराने और मौजूदा कर्मचारी ही शामिल थे।

पुलिस के अनुसार, घटना के बाद पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर एक विशेष जांच टीम बनाई गई थी। टीम ने सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्य और स्थानीय स्तर पर मिली जानकारियों के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़ते हुए त्वरित कार्रवाई की। इस दौरान सदर थाना पुलिस और जिला सूचना इकाई (DIU) की मदद से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
10 साल तक काम कर चुका कर्मचारी बना मास्टरमाइंड
जांच में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि मुख्य आरोपी मिथिलेश कुमार उर्फ सोनू कुमार करीब दस वर्षों तक उसी हैंडलूम दुकान में काम कर चुका था। दूसरे आरोपी बाबुल कुमार की भी दुकान से नजदीकी रही है। दोनों ने एक नाबालिग को साथ लेकर चोरी की पूरी साजिश रची और घटना को अंजाम दिया। सभी आरोपी सहरसा सदर थाना क्षेत्र के रहने वाले बताए जा रहे हैं।
चोरी की रकम से खरीदा महंगा मोबाइल बरामद
पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर चोरी गई राशि में से 1 लाख 95 हजार रुपये नकद बरामद किए हैं। इसके अलावा चोरी के पैसों से खरीदा गया एक महंगा आईफोन भी जब्त किया गया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक बाकी रकम की बरामदगी के लिए आगे की कार्रवाई जारी है।
इस पूरे मामले के खुलासे में सदर थाना अध्यक्ष सुबोध कुमार, एसआई धनेश्वर प्रसाद सिंह सहित पुलिस टीम और जिला सूचना इकाई के कर्मियों की अहम भूमिका रही। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, जबकि नाबालिग आरोपी को बाल सुधार गृह भेजने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।







