बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव की एक मौजूदगी ने सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। मौका था मकर संक्रांति से पहले आयोजित डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा के पारंपरिक दही-चूड़ा भोज का, जहां तेज प्रताप की शिरकत ने सबका ध्यान खींच लिया।

पटना में आयोजित इस भोज में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान समेत एनडीए के कई बड़े नेता शामिल हुए। खास बात यह रही कि तेज प्रताप यादव को इस कार्यक्रम का न्योता खुद डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने दिया था। मंच पर एनडीए नेताओं के बीच तेज प्रताप की मौजूदगी को राजनीतिक सौहार्द से कहीं आगे, संभावनाओं के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
भोज के दौरान विजय सिन्हा ने तेज प्रताप यादव को तिलकुट खिलाकर मकर संक्रांति की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान तेज प्रताप का बयान भी चर्चा का केंद्र बन गया। उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति के मौके पर अक्सर कुछ नया हो जाता है और वे अपना धर्म निभाने आए हैं।
जब मीडिया ने उनसे भाजपा या एनडीए में शामिल होने को लेकर सवाल किया तो उन्होंने न तो साफ इनकार किया और न ही खुलकर हामी भरी। मुस्कुराते हुए तेज प्रताप बोले—“अगर ऐसा कुछ होगा तो मैं खुद मीडिया को बता दूंगा, अभी से क्यों बताऊं?”
तेज प्रताप के इस बयान और एनडीए के मंच पर उनकी मौजूदगी ने बिहार की राजनीति में अटकलों का बाजार फिर गर्म कर दिया है। अब सवाल यही है—क्या यह सिर्फ एक शिष्टाचार मुलाकात थी या किसी बड़े सियासी बदलाव की भूमिका? जवाब फिलहाल भविष्य के पन्नों में छुपा है।







