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पटना हाईकोर्ट का सख्त रुख: नाबालिग को जेल में रखने पर सरकार को 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश, पुलिस और मजिस्ट्रेट पर गंभीर आरोप

January 13, 20260 Mins Read
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पटना उच्च न्यायालय ने बिहार पुलिस की कथित लापरवाही और कानून के उल्लंघन के मामलों पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि चोरी के झूठे आरोप में दो महीने से अधिक समय तक जेल में बंद रहे 16 वर्षीय नाबालिग को 5 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि पुलिस और मजिस्ट्रेट की गलतियों के कारण किशोर का जीवन और उसकी स्वतंत्रता का अधिकार छीना गया।

मामला मधेपुरा जिले के पुरैनी थाना क्षेत्र का है। 11 जुलाई को भूमि विवाद के दौरान एक पंचायत बैठक में मारपीट और लूट का आरोप लगाया गया था। इस मामले में 16 वर्षीय किशोर समेत 14 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। जांच में 10 आरोपियों पर कोई ठोस सबूत नहीं मिले, लेकिन पुलिस ने डीआईजी कोशी रेंज के निर्देशानुसार उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। नाबालिग को 25 अक्टूबर से करीब ढाई महीने तक जेल में रखा गया।

कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी की कार्यप्रणाली की कड़ी आलोचना की। न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद और न्यायमूर्ति रितेश कुमार की खंडपीठ ने कहा कि ठोस सबूत न होने के बावजूद नाबालिग को वयस्क बताकर गिरफ्तार किया गया। निचली अदालत के मजिस्ट्रेट पर भी कोर्ट ने टिप्पणी की कि उन्होंने बिना विवेक का इस्तेमाल किए उसे जेल भेजने का आदेश दिया।

अदालत के आदेश से स्पष्ट हो गया है कि कानून की गलत व्याख्या और पुलिस की लापरवाही पर अब कोई ढील नहीं दी जाएगी।

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