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रोहिणी के इस ताजा पोस्ट के बाद बिहार की सियासत में अटकलों का दौर तेज हो गया है। विपक्षी दल इसे राजद की अंदरूनी कलह का उदाहरण बता रहे हैं, जबकि पार्टी के अंदर इस मुद्दे पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह देखना दिलचस्प होगा कि रोहिणी आचार्य के इस बयान का आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति और राजद की आंतरिक राजनीति पर क्या असर पड़ता है।

January 10, 20261 Mins Read
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बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है। आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य के सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए परिवार और पार्टी के भीतर मौजूद लोगों पर तीखे शब्दों में सवाल खड़े किए हैं, जिसे सीधे तौर पर उनके भाई और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव से जोड़कर देखा जा रहा है।

रोहिणी आचार्य ने अपने पोस्ट में लिखा कि किसी मजबूत और मेहनत से खड़ी की गई विरासत को नुकसान पहुंचाने के लिए बाहरी ताकतों की जरूरत नहीं पड़ती। कई बार अपने ही लोग और कुछ ‘नए बने अपने’ ही इसके लिए काफी होते हैं। उनका कहना है कि सबसे ज्यादा पीड़ादायक स्थिति तब होती है, जब वही लोग उस पहचान को मिटाने में जुट जाते हैं, जिसकी वजह से उनका अस्तित्व बना होता है।

उन्होंने आगे लिखा कि जब विवेक कमजोर पड़ जाता है और अहंकार हावी हो जाता है, तब व्यक्ति सही-गलत का फर्क खो बैठता है। ऐसे समय में विनाश की सोच ही आंख, नाक और कान बन जाती है और बुद्धि-विवेक पर पर्दा डाल देती है।

हालांकि रोहिणी ने अपने बयान में किसी नेता का नाम नहीं लिया, लेकिन मौजूदा राजनीतिक हालात और पारिवारिक समीकरणों को देखते हुए उनके इस पोस्ट को तेजस्वी यादव पर अप्रत्यक्ष निशाने के तौर पर देखा जा रहा है। इससे पहले भी रोहिणी आचार्य अपने बयानों के जरिए पार्टी की कार्यशैली और पारिवारिक फैसलों पर सवाल उठाती रही हैं।

उनके इस ताजा बयान के बाद आरजेडी के भीतर चल रही खींचतान एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है। विपक्ष इसे पार्टी की अंदरूनी कलह बता रहा है, जबकि राजद नेतृत्व की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में यह बयान बिहार की राजनीति में किस तरह की नई दिशा देता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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